
पटना, बख्तियारपुर — 29 अगस्त 2026: बख्तियारपुर प्रखंड अंतर्गत राज ग्राम करनौती के रानीसराय, बड़का महमदपुर, रेलबे लाइन आदि गांवों को जनता की इच्छा के विरुद्ध, नियमों की अनदेखी करते हुए जबरन नगर परिषद में परिवर्तित करने की गम्भीर साजिश रची जा रही है। आज स्थानीय जनता ने यह चिंता और आपत्ति लिखित रूप में बाढ़ अनुमंडल पदाधिकारी के समक्ष रखी और विरोध स्वरूप शिकायत-पत्र सौंपा।

शिकायत में कहा गया है कि उक्त गाँवों में अधिकांश आबादी किसान और मजदूर हैं तथा करीब 80% आबादी अनुसूचित जाति, पिछड़ा एवं अति-पिछड़ा वर्ग से संबंधित है। ये परिवार आर्थिक रूप से कमजोर हैं और रोजमर्रा के खर्च भी मुश्किल से चलाते हैं। जनता का कहना है कि नगर परिषद में शामिल करने पर उन पर नए-नए कर, टैक्स और विमान लगाए जा सकते हैं, जिनका बोझ वे वहन नहीं कर पाएंगे। भारी कर-प्रतिबद्धता व दबाव के कारण कुछ लोग आत्महत्या करने पर मजबूर भी हो सकते हैं — यह आम जनता की वास्तविक चिंता है।

नेताओं और प्रखंड नेतृत्व की राय
प्रखंड प्रमुख जयमाला कुमारी और उप प्रमुख कंचन राय ने इस प्रस्ताव को गंभीर मानते हुए कहा कि यह जनविरोधी और नियम-निरपेक्ष कार्रवाई प्रतीत होती है। नेताओं ने आरोप लगाया कि नगर परिषद बख्तियारपुर के कार्यपालक पदाधिकारी, सभापति व उपसभापति कुछ हितधारकों के दबाव में आकर इस गलत प्रस्ताव के पक्ष में हैं। साथ ही स्थानीय प्रशासनिक कर्मचारियों की मिलीभगत की भी आशंका जताई गई है।
जन-आंदोलन की चेतावनी
अधिवक्ताओं और प्रभावित जनता ने चेतावनी दी है कि यदि बिना जनता की सहमति और नियमों का पालन किए इन गांवों को नगर परिषद में जबरन शामिल किया जाता है तो वे शांतिपूर्ण जन-आंदोलन और संगठित प्रतिरोध के लिए बाध्य होंगे। इसके लिए पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की मानी जाएगी। जनता यह भी मांग कर रही है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराकर स्थानीय लोगों की सहमति को ही प्राथमिकता दी जाए।
आंदोलन के संभावित कदम
स्थानीय लोगों द्वारा नियमित रूप से धरना, प्रदर्शन एवं पिटिशन।
प्रखंड और जिला प्रशासन के समक्ष पुनर्विचार हेतु विस्तृत शिकायत।
कानूनी विकल्पों पर विचार और आवश्यक होने पर न्यायिक हस्तक्षेप की मांग।
