
पटना, 19 सितंबर — बिहार राज्य पंच-सरपंच संघ के प्रदेश अध्यक्ष अमोद कुमार निराला एवं प्रदेश विधि सलाहकार अजय कुमार, अधिवक्ता ने मुख्यमंत्री और संबंधित उच्च अधिकारियों से तीव्र चिंता का परिचय देते हुए कहा है कि राज्य में त्रिस्तरीय और ग्राम कचहरी के निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के प्रति हो रहे जानलेवा हमलों तथा दर्जनों आपराधिक घटनाओं और हत्याओं पर तत्काल संज्ञान नहीं लिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अधिकारियों द्वारा सरकार के आदेशों और निर्देशों को न मानने से पंचायत प्रतिनिधियों की सुरक्षा खतरे में है।

इन नेताओं ने बताया कि मुख्य सचिव और विभागीय मंत्रियों तथा संबंधित अधिकारियों की उपस्थिति में मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार द्वारा 12 जून 2025 को आयोजित संवाद कक्ष की महत्वपूर्ण बैठक में पंचायती राज व्यवस्था सुदृढ़ीकरण हेतु कुल छह निर्णायक निर्देश जारी किए गए थे। बैठक में यह भी निर्णय लिया गया था कि त्रिस्तरीय एवं ग्राम कचहरी के निर्वाचित प्रतिनिधियों को शस्त्र लाइसेंस समयसीमा के भीतर उपलब्ध कराए जाएँ ताकि उनकी सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
पंचायती राज विभाग के सचिव मनोज कुमार तथा सरकार के अवर सचिव मनोज कुमार सिन्हा द्वारा सभी जिला दंडाधिकारी और संबंधित पुलिस अधीक्षकों को स्पष्ट रूप से निर्देश जारी किए गए थे कि आवेदनकर्ताओं को शस्त्र लाइसेंस प्रदान करने हेतु आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। परंतु अफसोसजनक रूप से राज्य में अब तक किसी भी निर्वाचित प्रतिनिधि को यह लाइसेंस प्रदत्त नहीं किया गया है। परिणामस्वरूप सरपंच, मुखिया, जिला परिषद प्रमुख और अन्य प्रतिनिधि सुरक्षा की दृष्टि से त्राहिमाम की स्थिति में हैं।
अमोद कुमार निराला ने सरकार से मांग की है कि:
तत्काल सभी जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षकों को निर्देशित किया जाए कि वे पूर्व निर्णयानुसार शस्त्र लाइसेंस निर्गत कराएँ।
प्रतिनिधियों की सुरक्षा के लिए त्वरित और प्रभावी कार्ययोजना लागू की जाए।
जिन जिलों में मुकदमों व रुकावटों के कारण लाइसेंस निर्गत नहीं हो पाए हैं, उन मामलों की विशेष जांच कराकर समस्याओं का समाधान किया जाए।
जिन प्रतिनिधियों पर हमले हुए हैं, उनकी सुरक्षा बढ़ाने हेतु विशेष सुरक्षा प्रबंध और निगरानी व्यवस्था की जाए।
प्रदेश विधि सलाहकार अजय कुमार ने भी कहा कि सरकार द्वारा प्रदत्त जन शिकायत निवारण और जनकल्याणकारी योजनाओं के सुचारु संचालन हेतु पंचायत प्रतिनिधियों की सुरक्षा अनिवार्य है। यदि प्रतिनिधि सुरक्षित नहीं होंगे तो योजनाओं का जमीन पर क्रियान्वयन प्रभावित होगा और ग्राम स्तर पर शासन की पहुंच कमजोर पड़ेगी।
अंत में, नेताओं ने मुख्यमंत्री कार्यालय से अनुरोध किया है कि वे संबंधित मंत्रीगण, मुख्य सचिव, विकास आयुक्त, विभागीय सचिव और जिलाधिकारी/पुलिस अधीक्षकों की उपस्थिति में तुरंत बैठक बुलाकर 12 जून 2025 के निर्णयों को अमलीजामा पहना कर सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दें और लागू होने की समयसीमा घोषित करें।
