
पंच सरपंच संघ, बिहार के प्रदेश अध्यक्ष अमोद कुमार निराला ने आज पटना से मुख्यमंत्री को एक खुला पत्र भेजा है जिसमें कहा गया है कि पंचायतों और ग्राम न्यायालयों को पैसा नहीं, बल्कि हक, अधिकार और सम्मान चाहिए। संघ ने राज्य सरकार से 11 सूत्रीय मांग-पत्र प्रस्तुत करते हुए कहा कि राज्य कोष से औकड़ी-निहित अनुदान नहीं चाहिए; वे स्थायी, पारदर्शी व नियमबद्ध व्यवस्थाओं की माँग कर रहे हैं ताकि ग्राम न्यायालय पूरे प्रदेश में प्रभावी रूप से चल सकें।
अमोद कुमार निराला ने बताया कि बिहार वह एकमात्र राज्य है जहाँ ग्राम न्यायालय विधिवत रूप से संचालित हैं और वे हर वर्ष लाखों मामलों का निस्तारण कर रहे हैं। इन न्यायालयों के कारण अनुमंडल व अन्य न्यायालयों पर बोझ कम हुआ है और ग्राम समाज में शांति-स्थैर्य व सस्ता, सरल तथा त्वरित न्याय सुनिश्चित हो रहा है। उन्होंने कहा कि यह मॉडल देश-विदेश के अध्ययनकर्ताओं को आकर्षित कर रहा है और यही कारण है कि बिहार न्याय के क्षेत्र में एक नया इतिहास रच रहा है।
संघ ने बताया कि वर्ष 2006 में तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने ग्राम न्यायालयों के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की थी। 18 वर्षों बाद यह पहल न्याय के क्षेत्र में ऐतिहासिक सफलता की सीढ़ी पर चढ़ चुकी है। पंच सरपंच संघ का कहना है कि यदि राज्य सरकार द्वारा उनके प्रस्तावित सभी 11 मांगों को लागू कर दिया गया तो 2029 तक बिहार न्यायिक क्षेत्र में एक “विश्व गुरु” के रूप में उभर सकता है।
पंच परमेश्वर से जुड़े प्रतिनिधियों का बयान रहा कि उन्हें प्रत्यक्ष आर्थिक अनुदान की चाह नहीं है; उनकी प्राथमिकता सुविधा, सहयोग, सुरक्षा तथा नियमों के अनुरूप सुविधाओं की स्थायी गारंटी है। संघ ने आश्वासन दिया कि ये मांगे पूरी होने पर ग्राम स्तर पर न्याय व्यवस्था और अधिक सुदृढ़, पारदर्शी और जवाबदेह बनेगी, जिससे समग्र सामाजिक-आर्थिक विकास को भी बल मिलेगा।
पंच सरपंच संघ ने मुख्यमंत्री से जल्द ही इन 11 सूत्रीय मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई की अपेक्षा जताई है और कहा है कि यह केवल पंच-ग्राम का नहीं बल्कि राज्य और राष्ट्रहित का विषय है।
पत्र के मुख्य बिंदु (सार):
ग्राम न्यायालयों को हक, अधिकार और सम्मान की मांग।
राज्य कोष से सिर्फ अनुदान नहीं, बल्कि नियमबद्ध व्यवस्था व सुरक्षा।
ग्राम न्यायालयों द्वारा प्रतिवर्ष लाखों मामलों का निस्तारण।
अनुमंडल व उच्च न्यायालयों पर बोझ में उल्लेखनीय कमी।
11 सूत्रीय मांग-पत्र लागू होने पर 2029 तक बिहार न्याय में विश्व गुरु बन सकता है।
ग्राम न्याय से सस्ता, सरल, समयबद्ध व पारदर्शी न्याय सुनिश्चित हो रहा है।
2006 की नीतीश सरकार की पहल का 18 वर्षों में फलित परिणाम।
