बिना परिसीमन व आरक्षण के पंचायत चुनाव असंवैधानिक: त्रिस्तरीय पंचायत प्रतिनिधि एवं पंच‑सरपंच संघ के नेतृत्व में महाबैठक में बड़े आंदोलन का ऐलान

पटना, 3 जून — बिहार में पंचायत चुनावों से जुड़े निर्णायक मुद्दे — परिसीमन और आरक्षण — को लेकर राजधानी पटना के दारोगा प्रसाद राय ट्रस्ट भवन में बुधवार को त्रिस्तरीय एवं ग्राम कचहरी प्रतिनिधि महासंघ की संयुक्त महाबैठक संपन्न हुई। बैठक की अध्यक्षता बिहार मुखिया महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष मिथिलेश कुमार राय ने की, जबकि संचालन पंच‑सरपंच संघ के प्रदेश अध्यक्ष आमोद कुमार निराला कर रहे थे। राज्यभर से पंच,सरपंच,वार्ड सदस्य, पंचायत समिति सदस्य, जिला परिषद सदस्य के जिलास्तरीय पदाधिकारियों ने महाबैठक में भाग लिया और सरकार को कड़ा संदेश दिया कि परिसीमन व आरक्षण के बिना पंचायत चुनाव कराना संवैधानिक मानदण्डों के खिलाफ होगा।

मिथिलेश राय का स्पष्ट संदेश

महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष मिथिलेश कुमार राय ने मंच से स्पष्ट कहा कि बिहार में परिसीमन और आरक्षण व्यवस्था के बिना चुनाव कराना असंवैधानिक है। उन्होंने कहा कि जब तक परिसीमन की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक चुनाव कराने का कोई औचित्य नहीं बनता। राय ने राज्य सरकार और विशेषकर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से अपील की कि वे पंचायत प्रतिनिधियों के पक्ष में उठ खड़े हों और पिछली सरकारों द्वारा किए गए बड़े फैसलों की तरह (जैसे कि पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा महिलाओं को 50% आरक्षण), अब परिसीमन और ओबीसी आरक्षण लागू कर नया इतिहास रचें।

पंच‑सरपंच संघ की मांगें और रणनीति

पंच‑सरपंच संघ के प्रदेश अध्यक्ष आमोद कुमार निराला ने बैठक में बताया कि परिसीमन व ओबीसी आयोग गठन संबंधी प्रस्ताव ग्रामसभा, प्रखंड पंचायत समिति और जिला परिषद से पारित कराकर उच्च अधिकारियों तक पहुँचाया जाएगा। उन्होंने कहा कि संघ ने आंदोलन की स्पष्ट रूपरेखा तैयार कर ली है: जून में आंदोलन पखवाड़ा, चरणबद्ध धरना‑प्रदर्शनों की योजना और यदि सरकार ने ठोस कदम नहीं उठाए तो जुलाई में पटना के बापू सभागार में बड़ा कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर आंदोलन को और तेज करते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया जाएगा और राज्यव्यापी बिहार बंद भी कराना संघ की रणनीति का हिस्सा होगा।

केंद्रीय बिंदु: नई जनगणना पर आधारित परिसीमन

महाबैठक को संबोधित करने वाले वक्ताओं — कृष्णा कुमारी यादव, गणेश चौधरी, जमादार प्रसाद, रश्मि कुमारी, जयमाला पासवान, बिंदु गुलाब यादव, बबलू यादव, किरणदेव यादव,महेश राय,भरत सिंह,बांका जिलाध्यक्ष समेत अन्य ने जोर देकर कहा कि पुराने जनसंख्या आंकड़ों के आधार पर चुनाव कराना लोकतांत्रिक आदर्शों के विरुद्ध है। उन्होंने कहा कि देश के दूसरे राज्यों की तरह बिहार में भी समय‑समय पर पंचायत परिसीमन होना चाहिए; 36 वर्षों से यह प्रक्रिया रुकी हुई है और इससे प्रतिनिधित्व असंतुलित हुआ है। प्रतिनिधियों ने मांग की कि पंचायतों को संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप आवश्यक शक्तियाँ और संसाधन भी दिए जाएँ ताकि ग्राम‑स्तर पर लोग प्रभावी रूप से सरकार की योजनाओं का लाभ उठा सकें।

पंचायती राज आयोग की माँग और प्रस्ताव

बैठक में पंचायती राज आयोग गठन की भी सिफारिश उठी, ताकि परिसीमन, आरक्षण व पंचायत संस्थाओं की शक्तियों के मुद्दे पर विशेषज्ञ एवं प्रतिनिधि स्तर पर ठोस सुझाव दिये जा सकें। प्रस्तावों में यह भी कहा गया कि राज्य निर्वाचन आयोग और पंचायती राज विभाग दोनों की जिम्मेदारी बनती है कि संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप पक्षों की भागीदारी से चुनावों का संचालन हो।

सरकार को चेतावनी: अब लड़ाई चरम पर

महाबैठक में मौजूद वक्ताओं और प्रतिनिधियों ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यह लड़ाई अब अपने चरम पर पहुँच चुकी है। गांव‑गांव में आरक्षण व परिसीमन की चर्चा जोरों पर है और यदि सरकार ने समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए तो संघ व्यापक आंदोलन करेगा। बैठक में मौजूद बड़ी संख्या में जिला परिषद संघ, मुखिया संघ के जिला व प्रखंड पदाधिकारी, प्रमुख संघ के प्रतिनिधि, पंच‑सरपंच संघ व वार्ड सदस्य संघ के जनप्रतिनिधियों,पंच सरपंच संघ के सहयोगी दिपू राणावत, मुखिया महासंघ के सहयोगी शंकर जी ने भी अपने समर्थन का ऐलान किया।

पंचायत प्रतिनिधियों का समर्पित अहवान

महाबैठक के समापन भाषण में सम्मिलित प्रतिनिधियों ने दो‑टूक कहा कि उनका मकसद केवल संस्थागत अधिकारों की रक्षा है। उन्होंने आश्वासन दिया कि आंदोलन शांतिपूर्ण रहेगा पर निर्णायक भी होगा। प्रतिनिधियों का कहना था कि सरकार से वार्ता के लिए दरवाजा खुला है—लेकिन समय सीमा के भीतर यदि कोई ठोस निर्णय नहीं आया तो राजनीतिक और सामाजिक दबाव बढ़ाने से परहेज़ नहीं किया जाएगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *