पंचायत चुनाव 2026 से पहले पटना हाईकोर्ट का अहम निर्देश: सीमांकन और आरक्षण पर दो महीने में फैसला करने का आदेश

पटना, 10 अप्रैल 2026: पंचायत चुनाव 2026 की तैयारियों के बीच पटना उच्च न्यायालय ने सीमांकन (डिलिमिटेशन) और आरक्षण व्यवस्था को लेकर महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। न्यायमूर्ति पार्थ सारथी की एकल पीठ ने प्रदेश मुखिया संघ और प्रदेश पंच सरपंच संघ की याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य निर्वाचन आयोग, बिहार को पंचायत निर्वाचन क्षेत्रों के सीमांकन के मामले में दो महीने के अंदर विधि सम्मत तरीके से निपटारा करने का निर्देश दिया है।

याचिकाकर्ताओं को चार सप्ताह के भीतर संबंधित प्राधिकार के समक्ष नया अभ्यावेदन दाखिल करने का भी निर्देश दिया गया है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद याचिका का निस्तारण किया और स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता अपना पक्ष पुनः प्राधिकार के सामने रखें।

याचिका में क्या मांग की गई?

प्रदेश मुखिया संघ के अध्यक्ष मिथिलेश कुमार राय और प्रदेश पंच सरपंच संघ के अध्यक्ष आमोद कुमार निराला ने याचिका में जिला परिषद, पंचायत समिति और ग्राम पंचायत निर्वाचन क्षेत्रों के सीमांकन पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि कई पंचायतों, पंचायत समितियों और वार्डों में वैधानिक जनसंख्या मानकों का पालन नहीं किया गया है।

याचिका में मुख्य मांग यह थी कि आरक्षण रोस्टर को 2022-23 के जाति आधारित सर्वेक्षण सहित अद्यतन आंकड़ों के आधार पर पुनर्निर्धारित किया जाए। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि वर्तमान सीमांकन और आरक्षण व्यवस्था संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) तथा अनुच्छेद 243C (पंचायतों की संरचना) का उल्लंघन करती है।

कोर्ट का आदेश क्यों महत्वपूर्ण?

यह आदेश पंचायत चुनाव 2026 की तैयारियों के बीच काफी अहम माना जा रहा है। बिहार में तीन स्तर की पंचायतों (ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद) के चुनाव की तैयारी चल रही है। यदि सीमांकन और आरक्षण में बदलाव होते हैं तो कई सीटों का आरक्षण स्वरूप बदल सकता है।

राज्य निर्वाचन आयोग अब दो महीने के अंदर इस मामले को कानून के अनुसार सुलझाने की प्रक्रिया शुरू करेगा। याचिकाकर्ताओं द्वारा नया अभ्यावेदन दाखिल करने के बाद आगे की कार्यवाही तेज होने की संभावना है।

पृष्ठभूमि

बिहार पंचायत चुनाव 2026 को लेकर पहले से ही सीमांकन और आरक्षण रोस्टर को लेकर चर्चा चल रही थी। याचिकाकर्ता लंबे समय से मांग कर रहे थे कि जनसंख्या में हुए बदलाव और जाति आधारित सर्वेक्षण के ताजा आंकड़ों को ध्यान में रखते हुए नया सीमांकन और आरक्षण किया जाए, ताकि संवैधानिक प्रावधानों का पूरा पालन हो सके।

यह आदेश स्थानीय निकाय चुनावों में पारदर्शिता और संवैधानिक मानकों के अनुपालन को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *