
सोनपुर (सारण) —सबलपुर बभनटोली स्थित ब्रज किशोर सदन में रविवार (24 मई 2026) ‘युग बोध’ साहित्यिक संस्था की संगोष्ठी में किसानों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने टोपो लैंड और जमीन रजिस्ट्री पर लगी रोक के खिलाफ तीखी नाराज़गी और प्रतिरोध का एलान किया। कार्यक्रम का विषय था: “स्वतंत्रता सेनानी स्व. ब्रह्मदेव सिंह की किसान आंदोलन में भूमिका” — जिसमें अतीत की शौर्य गाथा के साथ वर्तमान जमीन विवाद पर संघर्ष की रणनीति पर भी चर्चा हुई।

संगोष्ठी की अध्यक्षता प्रो. चंद्रभूषण तिवारी ने की, जबकि संस्था के संयोजक अवध किशोर शर्मा ने आयोजन संचालित किया। कार्यक्रम में नौ विशिष्ट व्यक्तियों को अंग वस्त्र से सम्मानित किया गया; इनमें साहित्यकार सुरेंद्र मानपुरी और सारंगधर प्रसाद सिंह प्रमुख थे। अन्य सम्मानियों में सामाजिक-पर्यावरण कार्यकर्ता अनिल कुमार सिंह, नगर नेता धनंजय सिंह व पूर्व डाक बाबू शंभूनाथ शर्मा शामिल रहे।

मुख्य वक्ता सुरेंद्र मानपुरी ने सबलपुर को ‘क्रांति की भूमि’ कहा और 1941–42 के किसान-सत्याग्रह तथा स्वतंत्रता संग्राम की याद दिलाते हुए वर्तमान विवाद को “यही पुरानी लड़ाई — अब कागज़ से” करार दिया। मानपुरी ने आरोप लगाया कि सेटेलाइट सिटी और हरिहरनाथ कॉरिडोर के नाम पर सरकार जमीनों को ‘टोपो लैंड’ बताकर रजिस्ट्री पर रोक लगा रही है, जबकि वही जमीन पहले मुआवजे के दायरे में आ चुकी थी।

कानूनी पक्ष से जुड़ा मुद्दा उठाते हुए वक्ताओं ने कहा कि रजिस्ट्री रोक अवैध है। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी सेतु के बाईपास के लिए इसी इलाके में पहले मुआवजा बांटा गया था, इसलिए पूरे क्षेत्र पर रोक का कोई वैध आधार नहीं है। पटना उच्च न्यायालय के विशेषज्ञ महेंद्र प्रताप के हवाले से सवाल भी उठाया गया कि बिना चिन्हित किए 80 गांवों पर प्रतिबंध कैसे लगाया गया। किसान नेताओं ने घोषणा की कि वे अदालत में रिकॉर्ड और दस्तावेज पेश करेंगे और सड़क-स्तर पर भी विरोध जारी रखेंगे।

संगोष्ठी में सरकार की आर्थिक नीतियों और कॉर्पोरेट-हितों पर भी तीखा हमला हुआ। वक्ताओं ने चेताया कि कृषि भूमि की बड़े पैमाने पर अतिक्रमण से स्थानीय अन्न भंडार खत्म हो जाएगा और किसान मजदूर बन कर शोषित होंगे। उन्होंने कहा कि चार गुना मुआवजा ‘भीख’ के समान है; उनकी मांग सम्मानजनक पुनर्वास और प्रभावित परिवार के कम से कम एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की है।

कार्यक्रम में स्थानीय नेताओं और नागरिकों ने स्वतंत्रता सेनानियों—ब्राह्मदेव सिंह, राम जीनिश सिंह, दरबारी सिंह और शहीद रामवृक्ष ब्रह्मचारी समेत सबलपुर के 20 स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि दी। भारी संख्या में ग्रामीण और शहीदों के परिजन उपस्थित रहे।

किसान नेता ब्रज किशोर शर्मा और अन्य वक्ताओं ने कलेक्टर पर स्थानीय फाइलों के साथ निष्ठा न रखने और पाँच दिनों में स्थायी निर्णय देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जब ब्लॉक स्तर पर फाइलें छह महीने जमी रहती हैं, तब प्रशासन की यह अचानक गति संदिग्ध है। अंत में संगोष्ठी ने कानूनी लड़ाई तेज करने और सार्वजनिक विरोध-प्रदर्शन के जरिए अपने अधिकार वापस लेने का संकल्प दोहराया।
