राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस पर पटना में जोरदार प्रदर्शन: परिसीमन और OBC आरक्षण के लिए उठी तेज आवाज

📍 पटना– राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस के अवसर पर पटना के मुखिया महासंघ राज्य कार्यालय में आयोजित एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम में त्रिस्तरीय पंचायत, ग्राम कचहरी प्रतिनिधि संघों और अन्य पंचायती संगठनों ने बिहार सरकार के समक्ष कई अहम मुद्दों को जोरदार तरीके से उठाया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य पंचायती राज व्यवस्था को और मजबूत बनाना था, ताकि ग्रामीण स्तर पर लोकतंत्र की जड़ें गहरी हो सकें। मुख्य अतिथि मिथिलेश कुमार राय ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया, जिसमें सैकड़ों पंचायत प्रतिनिधि, सरपंच, मुखिया और ग्राम कचहरी सदस्य शामिल हुए। प्रतिनिधियों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पंचायतें लोकतंत्र की आधारशिला हैं, लेकिन कई लंबे समय से लंबित मुद्दों के कारण उनकी कार्यक्षमता प्रभावित हो रही है।

🔴 परिसीमन की अनदेखी:

जनसंख्या के अनुपात में प्रतिनिधित्व की मांगकार्यक्रम का सबसे प्रमुख मुद्दा पंचायतों का परिसीमन रहा। प्रतिनिधियों ने बताया कि बिहार में 1994 के बाद से पंचायतों का कोई व्यापक परिसीमन नहीं हुआ है, जबकि देश के अन्य राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र में समय-समय पर यह प्रक्रिया दोहराई जाती रही है। बढ़ती जनसंख्या के कारण कई पंचायतों में प्रतिनिधियों की संख्या अपर्याप्त हो गई है, जिससे विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से अपील की कि तत्काल परिसीमन प्रक्रिया शुरू की जाए, ताकि प्रत्येक क्षेत्र की जनसंख्या के अनुपात में सही प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो सके। इससे न केवल ग्रामीण विकास तेज होगा, बल्कि महिलाओं और कमजोर वर्गों की भागीदारी भी बढ़ेगी।

🔴 OBC आरक्षण को संवैधानिक बनाने के लिए नया आयोग

OBC आरक्षण को लेकर भी प्रतिनिधियों ने बड़ा मुद्दा उठाया। सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्देशानुसार ‘ट्रिपल टेस्ट’ फॉर्मूला (डेटा संग्रह, प्रभाव मूल्यांकन और आरक्षण सीमा निर्धारण) लागू करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। संघों ने मांग की कि इसके लिए एक स्वतंत्र नया आयोग गठित किया जाए, जो वैज्ञानिक सर्वेक्षण कर आरक्षण को पूरी तरह संवैधानिक और न्यायसंगत बना सके। वर्तमान व्यवस्था में OBC आरक्षण पर अनिश्चितता के कारण पंचायती चुनाव प्रभावित हो रहे हैं, जिसका सीधा असर पिछड़े वर्गों के प्रतिनिधित्व पर पड़ रहा है। प्रतिनिधियों का कहना था कि बिना इसकी पंचायती राज व्यवस्था अधर में लटक जाएगी।

🔴 पंचायत सचिवों की हड़ताल: विभागीय लापरवाही का शिकार जनजीवन

कार्यक्रम में पंचायत सचिवों की लंबे समय से चल रही हड़ताल को भी प्रमुखता से उठाया गया। प्रतिनिधियों ने कहा कि सचिवों की मांगें—जैसे वेतन वृद्धि, पदोन्नति और कार्यस्थिति सुधार—पूरी तरह जायज हैं, लेकिन पंचायती राज विभाग की लापरवाही से यह स्थिति बनी है। हड़ताल के कारण प्रमाण-पत्र जारी करने से लेकर विकास योजनाओं तक सभी काम ठप हैं, जिससे आम ग्रामीणों का जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। मुख्यमंत्री से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की गई, ताकि बातचीत से विवाद सुलझे और पंचायतें सुचारू रूप से काम कर सकें।

🟢 पंचायतें लोकतंत्र की नींव:विकास और भागीदारी पर असर

अंत में, प्रतिनिधियों ने जोर देकर कहा कि पंचायतें लोकतंत्र की सबसे निचली और महत्वपूर्ण इकाई हैं। यदि परिसीमन, आरक्षण और स्टाफ संबंधी मुद्दों का समाधान नहीं हुआ, तो ग्रामीण विकास रुक जाएगा और जनभागीदारी कम हो जाएगी। कार्यक्रम में पंच सरपंच संघ के प्रदेश अध्यक्ष अमोद कुमार निराला, प्रमुख संघ कार्यकारी अध्यक्ष जयमाला कुमारी, जिला पार्षद प्रतिनिधि जयराम यादव, सरपंच दिलीप सिंह, मुखिया संघ प्रदेश उपाध्यक्ष शेर सिंह समेत कई अन्य नेता उपस्थित रहे। सभी ने संकल्प लिया कि ये मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखेंगे।

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