
महीनों से बिहार की आम जनता त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था और ग्राम कचहरी के साथ-साथ अंचल कार्यालयों के बंद होने से बेहद तंग, तबाह और परेशान है। ग्रामीण प्रशासन की रीढ़ माने जाने वाले अंचल कार्यालय पूरी तरह बंद हैं। राजस्व विभाग से जुड़े लगभग सभी महत्वपूर्ण कार्य ठप पड़े हैं।
चाहे जमाबंदी तैयार करना हो, दाखिल-खारिज हो, भूमि विवाद का निपटारा हो, आय-निवास-ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र जारी करना हो या आपदा प्रबंधन से जुड़ी कोई भी राहत – इन सभी कार्यों की शुरुआत और अंत अंचल कार्यालय से ही होता है। लेकिन गलत नीति निर्धारण के कारण वर्तमान में अंचल अधिकारी एवं राजस्व अधिकारी हड़ताल पर हैं, जिसके चलते पूरे बिहार में अंचल कार्यालयों का काम-काज पूरी तरह ठप हो गया है। इसका सीधा और व्यापक असर आम जनता पर पड़ रहा है।
वर्तमान स्थिति बेहद गंभीर
आज स्थिति यह है कि लोगों की जमाबंदी, दाखिल-खारिज, भूमि सुधार, भूमि बिक्री-खरीद जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण कार्य लंबे समय से रुके हुए हैं। कई परिवार अपनी बेटियों-बहनों की शादी या अन्य जरूरी कार्यों के लिए जमीन बेचने या खरीदने की प्रक्रिया शुरू करना चाहते हैं, लेकिन छोटे-छोटे राजस्व मामलों के उलझाव के कारण वे बेबस हैं।
आरटीपीएस (Right to Public Services) के अंतर्गत विभिन्न प्रमाणपत्र निर्गत नहीं हो पा रहे हैं। आगामी पंचायत चुनाव को मद्देनजर कई स्थानीय योजनाएं और विकासात्मक कार्य एनओसी (No Objection Certificate) न मिलने के कारण पूरी तरह प्रभावित हो गए हैं।
सबसे गंभीर प्रभाव भूमि विवाद पर
भूमि विवादों पर सबसे ज्यादा असर पड़ा है। पहले अंचल अधिकारी के स्तर पर जनता दरबार लगता था और मामले तुरंत सुनवाई होते थे। अब सुनवाई न होने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में आपसी विवाद, मारपीट और अपराध की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। ग्राम कचहरियों पर भी अत्यधिक दबाव बढ़ गया है। सरपंच अकेले इन मामलों का निपटारा कैसे करें?
अंचल अधिकारी आपदा प्रबंधन के नोडल अधिकारी भी हैं। फसल कटनी, आगजनी, दुर्घटना जैसी घटनाओं में तुरंत अंचल स्तर पर सक्रिय प्रशासन की जरूरत होती है। वर्तमान में उस व्यवस्था में भी पूरी तरह बाधा उत्पन्न हो गई है।
समस्या केवल अंचल स्तर तक सीमित नहीं
बिहार प्रदेश पंच सरपंच संघ के प्रदेश अध्यक्ष अमोद कुमार निराला ने जोर देकर कहा कि समस्या केवल अंचल स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि अनुमंडल और जिला स्तर तक भी व्याप्त है।
अनुमंडल भूमि सुधार समाहर्ता तथा जिला स्तर पर एडीएम (अपर जिला दंडाधिकारी) के यहां अपीलीय कार्यवाही होती है। वहां अनुभवी और योग्य राजस्व अधिकारियों की कमी के कारण मामलों का उचित और गुणवत्तापूर्ण निपटारा नहीं हो पा रहा है। अगर कोई व्यक्ति अंचल अधिकारी के निर्णय से असंतुष्ट है, तो उसे सशक्त अपीलीय मंच मिलना चाहिए। लेकिन वर्तमान स्थिति में लोगों को न्याय के लिए भटकना पड़ रहा है।
इसी कारण निचले स्तर पर असंतोष बढ़ रहा है और आम जनता का प्रशासनिक एवं न्यायिक व्यवस्था पर विश्वास कमजोर हो रहा है।
माननीय उच्च न्यायालय ने भी स्पष्ट रूप से कहा है कि इन महत्वपूर्ण पदों पर योग्यता प्राप्त एवं अनुभवयुक्त राजस्व अधिकारियों की नियुक्ति होनी चाहिए। इससे अपीलीय प्राधिकार मजबूत होगा, निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित होगी और आम जनता को न्याय व्यवस्था से बेहतर विश्वास मिलेगा।
सरपंच संघ का सुझाव और अपील
अमोद कुमार निराला ने आगे कहा, “मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री तथा राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री ईमानदार हैं, लेकिन सुना जा रहा है कि उनके पीए (निजी सचिव) बसा के पदाधिकारी मामले को समाप्त कराने में अड़चनें डाल रहे हैं। मेरा सुझाव है कि राजस्व अधिकारियों को राजस्व और बसा अधिकारियों को भूमि सुधार विभाग का जिम्मा दे दिया जाए, शायद इस तरह मामला समाप्त हो जाए।”उन्होंने मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और राजस्व मंत्री से अपील की कि अधिकारियों की जायज मांगों पर संवेदनशीलता और प्राथमिकता के साथ शीघ्र निर्णय लिया जाए। हड़ताल को तुरंत समाप्त कराया जाए और ऐसी सुदृढ़ प्रशासनिक व्यवस्था स्थापित की जाए जिसमें आम जनता को समय पर सेवा और न्याय मिल सके।“क्योंकि सबसे ज्यादा प्रभावित आम नागरिक और हम जनप्रतिनिधि हैं,”
आखिरी अपील
बिहार प्रदेश पंच सरपंच संघ ने सरकार से तुरंत हस्तक्षेप करने और ग्रामीण बिहार को इस राजस्व संकट से मुक्ति दिलाने की मांग की है। अन्यथा पंचायत स्तर पर व्यापक आंदोलन की चेतावनी भी दी गई है।
(अखबार एक्सप्रेस ब्यूरो)
