
पटना– माननीय मुख्य न्यायाधीश श्री संगम कुमार साहू, पटना उच्च न्यायालय एवं मुख्य संरक्षक, बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार, पटना तथा माननीय न्यायमूर्ति श्री राजीव रंजन प्रसाद, पटना उच्च न्यायालय, जे.ए.डी.-II एवं अध्यक्ष, बिहार न्यायिक अकादमी, पटना ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर नालसा (असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए विधिक सेवाएँ) योजना, 2015 पर आधारित विधिक जागरूकता कार्यक्रम का उद्घाटन किया। यह आयोजन ऊर्जा ऑडिटोरियम, राजवंशी नगर, पटना में संपन्न हुआ।
कार्यक्रम में पटना उच्च न्यायालय के कई गणमान्य न्यायमूर्तिगण, श्री पवन कुमार पाण्डेय (सदस्य सचिव, बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार), श्री रुपेश देव (प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश, पटना), श्री दीपक आनंद (सचिव, श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण विभाग), पटना उच्च न्यायालय रजिस्ट्री के पदाधिकारी, पटना न्यायमंडल के सभी न्यायिक पदाधिकारी, जिला प्रशासन के अधिकारी, पटना उच्च न्यायालय अधिवक्ता संघ के पदाधिकारी तथा लगभग 500 दैनिक श्रमिक (असंगठित क्षेत्र के कामगार) उपस्थित रहे।

इस अवसर पर श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं के तहत वित्तीय सहायता के चेक माननीय मुख्य न्यायाधीश एवं उनकी धर्मपत्नी, न्यायमूर्ति श्री राजीव रंजन प्रसाद तथा अन्य गणमान्य न्यायमूर्तियों द्वारा उपस्थित श्रमिकों/लाभार्थियों को प्रदान किए गए। साथ ही कई श्रमिकों को आयुष्मान भारत कार्ड का लाभ भी वितरित किया गया।
माननीय मुख्य न्यायाधीश श्री संगम कुमार साहू ने नालसा योजना की विस्तृत जानकारी देते हुए असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को उपलब्ध निःशुल्क विधिक सहायता की पूर्ण जानकारी प्रदान की। उन्होंने बिहार सरकार द्वारा संचालित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के बारे में भी विस्तार से बताया। न्यायमूर्ति श्री राजीव रंजन प्रसाद ने योजनाओं के अंतर्गत श्रमिकों के अधिकारों पर प्रकाश डाला। सदस्य सचिव श्री पवन कुमार पाण्डेय एवं श्री दीपक आनंद ने भी स्कीम की विस्तृत जानकारी साझा की। श्रम अधीक्षक पटना सुश्री नेहा आर्या ने असंगठित श्रमिकों से जुड़ी सभी योजनाओं की जानकारी दी।
कार्यक्रम का मंच संचालन सुश्री निहारिका सिंह (सहायक निबंधक, बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार) द्वारा किया गया, जबकि समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ श्रीमती पल्लवी आनंद (सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकार, पटना) द्वारा किया गया।
यह कार्यक्रम असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को उनके अधिकारों, सरकारी योजनाओं और निःशुल्क विधिक सहायता के प्रति जागरूक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ। नालसा योजना, 2015 का मुख्य उद्देश्य असंगठित श्रमिकों (जैसे निर्माण मजदूर, छोटे उद्योग कर्मी, प्रवासी मजदूर आदि) को उनके कानूनी अधिकारों की जानकारी देना और उन्हें विधिक सहायता उपलब्ध कराना है
