
पटना – बिहार के पंचायत स्तर के जन प्रतिनिधियों के लिए बड़ी राहत और उम्मीद की खबर आई है। केंद्र सरकार के पंचायती राज मंत्रालय ने आधिकारिक पत्र के माध्यम से स्पष्ट कर दिया है कि राज्य के ग्राम पंचायतों के निर्वाचित पंच एवं सरपंच बिहार विधान परिषद (MLC) चुनाव के स्थानीय निकाय निर्वाचन क्षेत्र में वैध मतदाता हैं।
संविधान के अनुच्छेद 171(3)(a) तथा जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 के स्पष्ट प्रावधानों के अनुसार ग्राम पंचायतें स्थानीय निकाय की श्रेणी में आती हैं। इसलिए इनके निर्वाचित प्रतिनिधि – पंच और सरपंच – MLC चुनाव में मतदान करने का पूरा संवैधानिक अधिकार रखते हैं। मंत्रालय ने इस बात पर जोर दिया है कि इसके लिए किसी नए कानून, संशोधन या अतिरिक्त प्रक्रिया की आवश्यकता नहीं है। यह अधिकार पहले से ही मौजूद है।
हालांकि, वर्तमान स्थिति चिंताजनक है। राज्य के किसी भी जिले की MLC मतदाता सूची में आज तक पंच-सरपंचों के नाम शामिल नहीं किए गए हैं। संगठनों का कहना है कि यह कोई कानूनी समस्या नहीं, बल्कि शुद्ध रूप से प्रशासनिक स्तर की लापरवाही और चूक है, जिसे तुरंत सुधारा जाना चाहिए।

उल्लेखनीय है कि पिछले 15 वर्षों से बिहार प्रदेश पंच सरपंच संघ इस मांग को लेकर निरंतर संघर्ष कर रहा है कि स्थानीय निकाय कोटे से विधान परिषद चुनाव में पंच-सरपंचों को मतदाता बनाया जाए। केंद्र सरकार के इस स्पष्टीकरण से उनकी मांग को मजबूत वैधानिक आधार मिल गया है।
इस संबंध में बिहार प्रदेश पंच सरपंच संघ के प्रदेश अध्यक्ष अमोद कुमार निराला ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी बिहार, मुख्य सचिव बिहार सरकार तथा पंचायती राज विभाग के सचिव को पत्र लिखकर मांग की है कि पंच एवं सरपंचों को तत्काल MLC मतदाता सूची में शामिल किया जाए।

इस मांग का समर्थन मुखिया महासंघ सह संयोजक त्रिस्तरीय पंचायत प्रतिनिधि संघ बिहार मिथिलेश कुमार राय सहित राज्य के सभी प्रमुख जन प्रतिनिधि संघों और संगठनों ने भी किया है। उन्होंने अमोद कुमार निराला के लंबे संघर्ष की सराहना करते हुए बिहार सरकार से शीघ्र कार्रवाई की अपील की है।
यह फैसला न केवल लाखों पंच-सरपंचों के अधिकारों की रक्षा करेगा, बल्कि स्थानीय निकाय प्रतिनिधियों की राजनीतिक भागीदारी को भी मजबूत बनाएगा। अब देखना यह है कि बिहार सरकार और निर्वाचन विभाग इस स्पष्टीकरण के आधार पर कितनी जल्दी कदम उठाते हैं।
