ग्राम कचहरी की बकाया राशि पर पदाधिकारियों की मनमानी नहीं चलेगी: अमोद निराला

पटना, 5 जनवरी 2026। बिहार में ग्राम कचहरियों के संचालन और निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के मानदेय भुगतान में लंबे समय से चल रही अनियमितता पर अब सख्ती बरतने की मांग तेज हो गई है। बिहार पंच-सरपंच संघ के प्रदेश अध्यक्ष अमोद कुमार निराला ने पंचायती राज विभाग के मंत्री श्री दीपक प्रकाश को संबोधित एक पत्र सौंपकर गंभीर मुद्दा उठाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य की सभी ग्राम कचहरियों तथा इनके निर्वाचित जनप्रतिनिधियों – पंच, सरपंच, उप-सरपंच, कर्मी, सचिव और न्याय मित्रों – का वर्षों का बकाया मानदेय, नियत एवं विशेष भत्ता, कंटिंजेंसी, किराए पर चल रही ग्राम कचहरियों का किराया, प्रशिक्षण का यात्रा भत्ता तथा पंचम राज्य वित्त आयोग की अनुशंसित फर्नीचर मद की राशि आदि का भुगतान नहीं किया गया है।श्री निराला ने पत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया कि वित्तीय वर्ष 2010-11 से अब तक का यह बकाया कुल करोड़ों रुपये में है, जिसे प्रखंड और जिला स्तर पर अब तक जारी नहीं कराया गया। इस वजह से राज्य की लगभग 85 प्रतिशत ग्रामीण आबादी की न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा कि भूखे-प्यासे रहकर कार्य करना असंभव है, और ग्राम कचहरी के जनप्रतिनिधि तथा कर्मी लंबे समय से आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। इससे ग्रामीण स्तर पर छोटे-मोटे विवादों का त्वरित निपटारा प्रभावित हो रहा है, जो ग्रामीण न्याय व्यवस्था की रीढ़ है।प्रदेश अध्यक्ष अमोद कुमार निराला ने मंत्री से अविलंब सभी बकायों की जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि पंचायत, प्रखंड तथा जिला स्तर पर जांच कर दोषी कर्मियों एवं पदाधिकारियों पर उचित कार्रवाई की जाए। साथ ही शीघ्र भुगतान सुनिश्चित किया जाए। यदि ऐसा नहीं हुआ तो संघ आंदोलन चलाने को बाध्य होगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार और प्रशासन पर होगी।इस आवेदन पर पंचायती राज मंत्री श्री दीपक प्रकाश ने त्वरित संज्ञान लेते हुए निदेशक, पंचायती राज विभाग को निर्देश जारी किया है कि अविलंब आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। इससे ग्राम कचहरी से जुड़े हजारों जनप्रतिनिधियों और कर्मियों में उम्मीद जगी है कि लंबित भुगतान जल्द पूरा होगा।बिहार में ग्राम कचहरियां ग्रामीण न्याय व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, जो छोटे विवादों को स्थानीय स्तर पर सुलझाती हैं और अदालतों पर बोझ कम करती हैं। लेकिन बकाया भुगतान की समस्या वर्षों से चली आ रही है, जिससे इनकी कार्यक्षमता प्रभावित हो रही है। संघ की यह पहल यदि सफल होती है तो ग्रामीण बिहार की न्याय प्रक्रिया को मजबूती मिलेगी।

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