पटना साहिब: रविशंकर प्रसाद ने कायस्थ समाज को साधा, रत्नेश कुशवाहा को जिताने की अपील

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में सभी राजनीतिक दल अपनी पूरी ताकत लगा रहे हैं। वोटरों को साधने की कवायद जोरों पर है। इसी सिलसिले में पटना साहिब लोकसभा क्षेत्र के सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने पटना सिटी के खाजेकलां इलाके में एक सामुदायिक भवन में कायस्थ समाज के लोगों के साथ अहम बैठक की।

इस मौके पर रविशंकर प्रसाद ने विकास का नारा बुलंद करते हुए कायस्थ समाज से NDA के पक्ष में एकजुट होकर वोट देने की अपील की। उन्होंने कहा, “देश के नवनिर्माण में कायस्थ समाज की भूमिका हमेशा से अहम रही है। आप लोगों ने शिक्षा, प्रशासन और समाज सेवा में हमेशा आगे रहकर योगदान दिया है। अब समय है कि पटना साहिब विधानसभा क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी रत्नेश कुशवाहा को प्रचंड बहुमत के साथ जिताकर बिहार में फिर से सुशासन की सरकार बनाई जाए।”

बैठक में मौजूद भाजपा उम्मीदवार रत्नेश कुशवाहा ने भी कायस्थ समाज को धन्यवाद देते हुए कहा, “कायस्थ समाज शुरू से ही भाजपा का मजबूत समर्थक रहा है। देश और प्रदेश में केंद्र की मोदी सरकार और बिहार में नीतीश सरकार ने जो विकास कार्य किए हैं – सड़क, बिजली, पानी, सुरक्षा – उसे देखते हुए मुझे पूरा विश्वास है कि कायस्थ भाई-बहन हमें फिर से आशीर्वाद देंगे।”

पटना साहिब एक पूरी तरह शहरी सीट है, जहां कायस्थ वोटरों की संख्या 20-30 हजार के आसपास मानी जाती है। ये वोटर स्विंग फैक्टर की भूमिका निभाते हैं। पहले यहां से 7 बार जीते नंद किशोर यादव को भी कायस्थ समाज का अच्छा समर्थन मिलता रहा है। इस बार भाजपा ने कुशवाहा समाज से आने वाले युवा नेता रत्नेश कुशवाहा को टिकट दिया है, ताकि OBC और वैश्य वोट बैंक मजबूत हो। लेकिन ऊपरी जातियों, खासकर कायस्थों में टिकट कटने से कुछ नाराजगी की खबरें थीं।

रविशंकर प्रसाद की यह बैठक उसी नाराजगी को दूर करने और कायस्थ वोट को एकजुट करने की रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। सूत्र बताते हैं कि आने वाले दिनों में और भी समाज-विशेष बैठकों का दौर चलेगा।

वहीं, विपक्षी इंडिया गठबंधन (कांग्रेस) ने शशांत शेखर (यादव) को मैदान में उतारा है, जो यादव-मुस्लिम-मल्लाह (MYM) गठजोड़ पर भरोसा कर रहा है। ऐसे में कायस्थ वोट का झुकाव किस तरफ होगा, यह चुनाव का बड़ा सवाल है।

मतदान 6 नवंबर को है। पटना साहिब एक बार फिर साबित करने जा रहा है कि बिहार की राजनीति में जाति और विकास का संतुलन ही जीत की कुंजी है।

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