प्रथम एजुकेशन फाउंडेशन का सेकेंड चांस कार्यक्रम: पटना के 22 हाई स्कूलों में 381 अनुत्तीर्ण बालिकाओं को मिला शैक्षणिक सहयोग, बिहार बोर्ड परीक्षा में लौटा आत्मविश्वास

पटना: स्वयंसेवी संस्था प्रथम एजुकेशन फाउंडेशन ने बिहार की बालिकाओं की शिक्षा को मजबूत बनाने की दिशा में सराहनीय कदम उठाया है। संस्था द्वारा संचालित सेकेंड चांस कार्यक्रम के तहत पटना शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्र के कुल 22 हाई स्कूलों में बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (बिहार बोर्ड) की परीक्षा में अनुत्तीर्ण हुई 381 बालिकाओं को निरंतर शैक्षणिक सहयोग प्रदान किया जा रहा है।

इस कार्यक्रम का मुख्य लक्ष्य उन बालिकाओं को पुनः मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ना है जो एक बार असफलता के कारण हतोत्साहित हो गई थीं। संस्था का मानना है कि उचित मार्गदर्शन, नियमित अभ्यास और सकारात्मक माहौल से हर बालिका अपनी शैक्षणिक चुनौतियों पर विजय प्राप्त कर सकती है।

कार्यक्रम की खासियतें क्या हैं?

चयनित विद्यालयों में विशेष कक्षाओं का नियमित आयोजन।

प्रमुख विषयों जैसे गणित, विज्ञान, हिंदी और अंग्रेजी पर विशेष फोकस।

अभ्यास सत्र, समस्या-समाधान技巧 और व्यक्तिगत सहयोग।

छात्राओं की प्रगति की निरंतर मॉनिटरिंग और मूल्यांकन।

बिहार बोर्ड की वार्षिक परीक्षा के प्रथम दिन पर परीक्षा केंद्रों पर एक उत्साहपूर्ण माहौल देखने को मिला। विशेषकर इन 381 बालिकाओं में जबरदस्त आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा दिखाई दी। संस्था के मार्गदर्शन ने उन्हें न केवल शैक्षणिक रूप से मजबूत किया, बल्कि मानसिक रूप से भी तैयार किया। कई बालिकाओं ने बताया कि पहले जहां असफलता का डर था, अब सफलता की उम्मीद जगी है।

संस्था के राज्य कार्यक्रम समन्वयक राजेश कुमार पाण्डेय के नेतृत्व में स्नेहा रानी, नदीश्वरी कुमारी, रुचि गुप्ता, श्वेता कुमारी, आकाश कुमार और गौरव कुमार जैसे समर्पित सदस्यों की टीम ने इस कार्यक्रम को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाई है। शिक्षकों, विद्यालय प्रबंधन और अभिभावकों के सहयोग से यह पहल और प्रभावी साबित हो रही है।

प्रथम एजुकेशन फाउंडेशन का कहना है कि इस तरह के प्रयासों से न केवल बालिकाओं की शैक्षणिक यात्रा सुचारु होती है, बल्कि समाज में लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा मिलता है। संस्था भविष्य में इस कार्यक्रम को और अधिक स्कूलों और जिलों तक विस्तारित करने की योजना बना रही है।

यह खबर बालिका शिक्षा के क्षेत्र में एक प्रेरणादायक मिसाल पेश करती है। आशा है कि ऐसे प्रयास बिहार की हजारों बालिकाओं के जीवन को रोशन करेंगे।

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