पटना सिविल कोर्ट के अधिवक्ताओं ने धूमधाम से मनाई सावित्रीबाई फूले की 195वीं जयंती

पटना: भारत की पहली महिला शिक्षिका और समाज सुधारक सावित्रीबाई फूले की 195वीं जयंती पटना सिविल कोर्ट के अधिवक्ताओं द्वारा बड़े उत्साह और धूमधाम से मनाई गई। यह कार्यक्रम संघ के हॉल नंबर एक में आयोजित किया गया, जहां सैकड़ों अधिवक्ताओं ने भाग लिया और सावित्रीबाई फूले के जीवन तथा उनके महिला शिक्षा और सामाजिक सुधार के क्षेत्र में अथक योगदान को श्रद्धांजलि अर्पित की।कार्यक्रम की अध्यक्षता एडवोकेट संतोष कुमार ने की, जबकि संचालन अधिवक्ता महेश रजक ने कुशलतापूर्वक किया। मुख्य वक्ताओं में राम जीवन प्रसाद सिंह, सैयद इमरान घनी, बरखा, नाजिया शबा, शिवशंकर लाल और अंजुम बारी शामिल थे। इन सभी ने अपने संबोधन में सावित्रीबाई फूले को नमन करते हुए उनके संघर्षों को याद किया।वक्ताओं ने कहा कि सावित्रीबाई फूले ने उस दौर में, जब महिलाओं को सामूहिक रूप से शिक्षा से वंचित रखा जाता था, हर प्रकार की सामाजिक प्रताड़ना और उत्पीड़न का सामना करते हुए अपने संकल्प पर डटी रहीं। उनके प्रयासों का ही परिणाम है कि आज पूरे देश में महिलाएं शिक्षित हो रही हैं और हर क्षेत्र में अपनी अग्रणी भूमिका निभा रही हैं। सभी अधिवक्ताओं ने उनके प्रति कोटि-कोटि धन्यवाद ज्ञापित किया और कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में भी उन्हें याद करना और उनके आदर्शों पर चलना अत्यंत आवश्यक है।इस अवसर पर उपस्थित सभी गणमान्य अधिवक्ताओं ने एक संकल्प लिया कि वे देश की महिलाओं और युवाओं को शिक्षित बनाने के लिए अथक संघर्ष करेंगे। यह संकल्प सावित्रीबाई फूले के शिक्षा और समानता के सपने को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।कार्यक्रम में मुख्य रूप से नीरज कुमार, राम प्रवेश निषाद, टिंकू कुमार, मोहम्मद शमसुद्दीन, सियाराम कुमार, कमलेश्वर शर्मा, आदित्य राज, अभय कुमार, अंकिता कुमारी सहित सैकड़ों अधिवक्ता उपस्थित रहे। सभी ने मिलकर सावित्रीबाई फूले के चित्र पर माल्यार्पण किया और उनके योगदान को स्मरण किया।सावित्रीबाई फूले का जन्म 3 जनवरी 1831 को महाराष्ट्र में हुआ था। उन्होंने अपने पति ज्योतिराव फूले के साथ मिलकर 1848 में पुणे में देश का पहला बालिका विद्यालय खोला और महिलाओं के उत्थान के लिए जीवनभर कार्य किया। उनकी यह जयंती पूरे देश में महिला शिक्षा दिवस के रूप में भी मनाई जाती है। पटना सिविल कोर्ट के इस आयोजन ने उनके आदर्शों को जीवंत रखने का संदेश दिया।

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