
Bihar Election 2025 – Phase 1 Voting Ground Report
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण की वोटिंग समाप्त होने के बाद राजनीतिक हलचलों का दौर तेज हो गया है। हर दल अपनी जीत का दावा कर रहा है, लेकिन मतदाता व्यवहार और ग्राउंड ट्रेंड कई अहम संकेत दे रहे हैं।
मतदान प्रतिशत को लेकर बहस जारी है, हालांकि ताज़ा राजनीतिक परिदृश्य में अधिक या कम मतदान को अब सीधे तौर पर सत्ता के पक्ष या विपक्ष से नहीं जोड़ा जा रहा। हालिया चुनावों में महाराष्ट्र और झारखंड में अधिक मतदान ने सत्ता बरकरार रखी थी, जबकि दिल्ली में कम मतदान सत्ता परिवर्तन का कारण बना। इसलिए बिहार में भी वोटिंग प्रतिशत को निर्णायक मानना मुश्किल है।
रोजगार और विकास बने मुख्य मुद्दे
पहले चरण की वोटिंग में दो मुद्दे साफ़ तौर पर हावी रहे — रोजगार और विकास।
ग्राउंड इनपुट्स के अनुसार पुरुष मतदाताओं के लिए रोजगार प्रमुख मुद्दा रहा, जबकि महिला मतदाताओं ने विकास और सरकारी योजनाओं को प्राथमिकता दी। इससे चुनावी दिशा पर महिलाओं की निर्णायक भूमिका का संकेत मिलता है।
PK फैक्टर और विपक्षी समीकरणपहले चरण में प्रशांत किशोर का फैक्टर स्पष्ट दिखाई दिया।
कई सीटों पर एंटी-इनकंबेंसी वोट का बड़ा हिस्सा उनके उम्मीदवारों के खाते में गया। यह वही स्पेस है जिसे 2020 के चुनाव में चिराग पासवान ने भरा था।वहीं महागठबंधन में उत्साह और समन्वय की कमी तथा कुछ स्थानों पर फ्रेंडली फाइट की वजह से विपक्ष प्रभावी रणनीति बनाता नज़र नहीं आया। युवाओं के बीच रोजगार मुद्दे पर कांग्रेस और सहनी की पकड़ उतनी मज़बूत नहीं दिखी।
महिला वोटिंग में ध्रुवीकरण
पहले चरण के मतदान में महिला वोटिंग पैटर्न विशेष रूप से चर्चा में रहा।
मुस्लिम महिलाओं का वोट बड़े पैमाने पर एनडीए के खिलाफ गया!
हिंदू महिलाओं ने एनडीए के पक्ष में अधिक संख्या में मतदान कियानीतीश सरकार की योजनाओं तथा जीविका समूहों के साथ लंबे समय से बने नेटवर्क का स्पष्ट असर दिखाई दिया।
ग्रामीण-शहरी अंतर
शहरी इलाकों में मतदान अपेक्षाकृत धीमा रहा।यह स्थिति सत्ता पक्ष के लिए चुनौती बन सकती है, क्योंकि शहरी मतदाता इस बार उत्साहहीन दिखे।दीघा, कुम्हरार, मुजफ्फरपुर और पारू जैसी सीटों पर करीबी मुकाबले की संभावना जताई जा रही है।
अंतिम चरण का कैंपेन असरदार
चुनाव अभियान के अंतिम दिनों में बारिश में पैदल और सड़क मार्ग से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का दौरा प्रभावी रहा।इस पहल ने उनके प्रति सहानुभूति और भरोसा दोनों बढ़ाया और “बीमार नीतीश” वाली धारणा को कमजोर किया। इसे सत्ता पक्ष के लिए गेम-चेंजर मूव माना जा रहा है।
अनंत सिंह फैक्टर
अनंत सिंह के जेल जाने का असर भी बेगूसराय, समस्तीपुर और मुंगेर क्षेत्र में स्पष्ट दिखा। यह प्रभाव दोनों दिशाओं में देखने को मिला और कुछ सीटों पर मुकाबला कड़ा हो गया।
निष्कर्ष
पहले चरण की वोटिंग मिश्रित संकेतों के साथ खत्म हुई है।
महिलाओं का रुझान निर्णायक
PK ने एंटी-इनकंबेंसी वोट शेयर कैप्चर किया
युवाओं का मूड रोजगार पर केंद्रित
शहरी उदासीनता सत्ता पक्ष के लिए चुनौती
ग्रामीण क्षेत्रों में योजनाओं का असर
अंतिम परिणाम वोट गिनती के बाद ही स्पष्ट होंगे, लेकिन शुरुआती संकेत बता रहे हैं कि मुकाबला कड़ा है और बिहार में यह चुनाव चेहरे, योजनाओं और विश्वास की लड़ाई बन चुका है।
