
ऑफिस डेस्क — बिहार की राजनीतिक चौपाल पर एक बार फिर ‘अगड़ा vs पिछड़ा’ का पुराना राग अलापा जा रहा है, लेकिन इस बार एनडीए ने इसका जवाब ढूंढ लिया है – नीतीश कुमार को ढाल बनाकर। खासकर अतिपिछड़ा बहुल शाहाबाद इलाके में, जहां एनडीए की जमीनी पकड़ हमेशा लुढ़क जाती रही है, गठबंधन अब ‘नीतीश ही CM’ के मंत्र से वोटरों को लुभाने की कोशिश में जुटा है। 2020 के विधानसभा चुनाव में यहां की 22 सीटों पर महज दो ही सीट हासिल करने वाला एनडीए इस बार कोई कसर नहीं छोड़ना चाहता।शाहाबाद,भोजपुर, बक्सर, कैमूर और रोहतास जिलों का यह इलाका एनडीए के लिए हमेशा सिरदर्द रहा है। अतिपिछड़ों की बड़ी आबादी वाले इन इलाकों में वोटिंग का पैटर्न साफ है: अगड़ा बनाम पिछड़ा।
नतीजा? 2020 में भाजपा-जदयू ने मिलकर 21 सीटों पर दांव लगाया (भाजपा को 11, जदयू को 10, और वीआईपी को एक), लेकिन सिर्फ आरा और बड़हरा पर जीत मिली। बाकी 20 सीटें महागठबंधन के खाते में। लोकसभा चुनावों में भी यही कहानी दोहराई गई। एनडीए का मानना है कि CM चेहरे को लेकर भ्रम ही इस हार का सबब बना। अब सुधार का वक्त आ गया है।’
नीतीश ही होंगे CM’ हर मंच पर गूंज रहा नारा एनडीए की पहली रणनीति साफ है
अतिपिछड़ों को गले लगाओ, नीतीश को आगे करो। गठबंधन के तमाम नेता अब हर सभा में यही दुहरा रहे हैं – “नीतीश कुमार ही मुख्यमंत्री होंगे”। एक वरिष्ठ एनडीए नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “अगर कहीं CM को लेकर कन्फ्यूजन फैला, तो शाहाबाद फिर एनडीए की कब्रगाह बन जाएगा। नीतीश का चेहरा ही पिछड़ों-आतिपिछड़ों का भरोसा जगाएगा।”इस कैंपेन की अगुवाई कर रहे हैं राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (रालोसपा) के नेता उपेंद्र कुशवाहा डुमरांव की एक सभा में, खुद नीतीश के मंच पर खड़े होकर उन्होंने जोरदार ऐलान किया: “नीतीश कुमार मुख्यमंत्री थे, हैं और आगे भी रहेंगे। किसी के मन में इस पर कोई कन्फ्यूजन नहीं होना चाहिए।” कुशवाहा का यह बयान एनडीए के अंदरूनी संदेश को साफ कर रहा है – कोई सेंट्रल लीडरशिप का दबाव हो या न हो, बिहार में नीतीश ही ‘फाइनल’ हैं।

जीतनराम मांझी की वकालत: ‘दूल्हा तैयार है, शादी कर लो‘
HAM (हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा) के संरक्षक और केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी भी नीतीश को CM चेहरा बनाने की मांग पर अडिग हैं। उन्होंने कहा, “नीतीश को दूल्हा मान ही लिया है, तो देर कैसी? मैं एनडीए की अगली बैठक में इस मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाऊंगा।” मांझी का यह स्टैंड अतिपिछड़ों के बीच उनकी अपनी पकड़ को मजबूत करने का भी जरिया लगता है।
चिराग पासवान का साथ
अमित शाह के बयान का ‘अर्थ’ समझा रहे लोजपा (रा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान भी नीतीश के पक्ष में खुलकर उतर चुके हैं। वे लगातार गृह मंत्री अमित शाह के उस बयान का हवाला देकर कह रहे हैं, जिसमें शाह ने ‘सामूहिक नेतृत्व’ की बात कही थी। चिराग का मतलब साफ: “अर्थ यही है कि नीतीश ही फिर से CM बनेंगे।” पासवान का यह रुख उनके पिता रामविलास पासवान की विरासत को संभालते हुए एनडीए के दलित-आतिपिछड़ा वोट बैंक को एकजुट करने की कोशिश है।
क्या बदलेगा समीकरण?

एनडीए को लगता है कि ‘नीतीश फॉर्मूला’ से शाहाबाद की 22 सीटों में से कम से कम 10-12 पर सेंध लग सकती है। लेकिन चुनौती बड़ी है – महागठबंधन तेजस्वी यादव के नेतृत्व में ‘पिछड़ा एकता’ का नारा बुलंद कर रहा है। वोटिंग डे पर अगर ‘अगड़ा vs पिछड़ा’ का ध्रुवीकरण फिर हुआ, तो नीतीश की ढाल कितनी मजबूत साबित होगी? आने वाले दिनों की सभाओं से साफ होगा। फिलहाल, एनडीए का यह दांव बिहार की सियासत को नया मोड़ दे सकता है।
यह विश्लेषण हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों पर आधारित है।
